प्रिय भारतवासियों
आप सभी जानते हैं कि विश्व का परिदृश्य आज बड़ा तेजी के साथ बदल रहा है। वर्तमान में सैन्य शक्ति का इतना महत्व नहीं है जितना आर्थिक व सांस्कृतिक शक्ति का। इसी परिप्रेक्ष्य में आज हमारे देश को सबसे बड़ा खतरा सांस्कृतिक व आर्थिक गुलामी का है। कुछ विदेशी विघटनकारी शक्तियाँ भारत सरकार का फायदा उठाकर आज पुनः भारतीयों के पैरों में गुलामी की बेड़ियाँ डालना चाहती हैं।
इस कार्य में उनका सबसे बड़ा सहयोगी है भारत सरकार के कठपुतली प्रधानमंत्री की सूत्रधार सोनिया गाँधी। सोनिया का निवास भले ही भारतीय है लेकिन उसका दिल अभी भी भारतीय नहीं हो सका है। अतः विदेशी ताकतों के बहकावे में आकर काँग्रेस नीत सरकार आज भारत के समाज और उसकी आर्थिक व्यवस्था को भिन्न- भिन्न तरीकों से तोड़ने में लगी है। रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हमारे स्थानीय दुकानदारों की तबाही का सीधा सीधा आमंत्रण ही है। जो सरकार इतने व्यापक जनविरोध के बावजूद राष्ट्रविरोधी फैसले पर अडिग रहना चाहती हो तो उसका इरादा राष्ट्र के विनाश का ही प्रतीत होता है न कि राष्ट्र कल्याण का । रही बात भारत के आर्थिक महाशक्ति बनने की। भारत आज अपने देशभक्त व मेहनतकश लोगों के परिश्रम के कारण आर्थिक महाशक्ति बन रहा है न कि देश की संपत्ति को डकारनेवाले नेताओं की नीतियों के कारण। आज भारत के प्रधानमंत्री भले ही अर्थशास्त्री हैं लेकिन महंगाई पर लगाम लगाने में उनकी नीतियों का हमारे लिये कोई उपयोग नहीं है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि पूरी काँग्रेस पार्टी ही खराब है। ऐसी बात नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि दस जनपथ की आज्ञा के बिना कोई भी कांग्रेसी किसी अच्छे काम को करने में शामिल नहीं हो सकता। न ही वह गाँधी परिवार की स्वामिभक्ति से किनारा कर सकता है।
अतः आप ऐसे कुचक्रों से सावधान रहें जो राष्ट्रहित में न होकर राष्ट्रविरोध में हों।
आप सभी जानते हैं कि विश्व का परिदृश्य आज बड़ा तेजी के साथ बदल रहा है। वर्तमान में सैन्य शक्ति का इतना महत्व नहीं है जितना आर्थिक व सांस्कृतिक शक्ति का। इसी परिप्रेक्ष्य में आज हमारे देश को सबसे बड़ा खतरा सांस्कृतिक व आर्थिक गुलामी का है। कुछ विदेशी विघटनकारी शक्तियाँ भारत सरकार का फायदा उठाकर आज पुनः भारतीयों के पैरों में गुलामी की बेड़ियाँ डालना चाहती हैं।
इस कार्य में उनका सबसे बड़ा सहयोगी है भारत सरकार के कठपुतली प्रधानमंत्री की सूत्रधार सोनिया गाँधी। सोनिया का निवास भले ही भारतीय है लेकिन उसका दिल अभी भी भारतीय नहीं हो सका है। अतः विदेशी ताकतों के बहकावे में आकर काँग्रेस नीत सरकार आज भारत के समाज और उसकी आर्थिक व्यवस्था को भिन्न- भिन्न तरीकों से तोड़ने में लगी है। रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हमारे स्थानीय दुकानदारों की तबाही का सीधा सीधा आमंत्रण ही है। जो सरकार इतने व्यापक जनविरोध के बावजूद राष्ट्रविरोधी फैसले पर अडिग रहना चाहती हो तो उसका इरादा राष्ट्र के विनाश का ही प्रतीत होता है न कि राष्ट्र कल्याण का । रही बात भारत के आर्थिक महाशक्ति बनने की। भारत आज अपने देशभक्त व मेहनतकश लोगों के परिश्रम के कारण आर्थिक महाशक्ति बन रहा है न कि देश की संपत्ति को डकारनेवाले नेताओं की नीतियों के कारण। आज भारत के प्रधानमंत्री भले ही अर्थशास्त्री हैं लेकिन महंगाई पर लगाम लगाने में उनकी नीतियों का हमारे लिये कोई उपयोग नहीं है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि पूरी काँग्रेस पार्टी ही खराब है। ऐसी बात नहीं है। लेकिन समस्या यह है कि दस जनपथ की आज्ञा के बिना कोई भी कांग्रेसी किसी अच्छे काम को करने में शामिल नहीं हो सकता। न ही वह गाँधी परिवार की स्वामिभक्ति से किनारा कर सकता है।
अतः आप ऐसे कुचक्रों से सावधान रहें जो राष्ट्रहित में न होकर राष्ट्रविरोध में हों।